ये सिरविहीन मूर्तिया गुर्जरों के मिटे हुए इतिहास और पहचान का प्रतीक हैं|

ये सिरविहीन मूर्तिया गुर्जरों के मिटे हुए इतिहास और पहचान का प्रतीक हैं|

2016 IGD के अवसर पर जावली में मैंने कहा था कि “मेरे इतिहास लेखन का एक लक्ष्य उनके सिर लगवाना हैं जिनके सिर तोड़ दिए गए हैं|”

साथियो इतिहास अधिकतर सभ्रांत और अभिजात्य मानसिकता से लिखा जाता हैं| इस कारण से वर्तमान में गैर-अभिजात वर्ग गिने वाले जाट, अहीर, गुर्जर, लोध, कुर्मी , जाटव, भील, मुंडा संथाल, मेव, मीणा लुहार, बढई आदि भारत की लगभग पांच हज़ार जातियों और कबीलों को भारतीय इतिहास में उचित स्थान नहीं मिल पाया हैं| नस्लीय जातिगत पूर्वाग्रह तथा अभिजात्य मानसिकता की वज़ह से, बहुधा इनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों की उपेक्षा की गई हैं या फिर इनके इतिहास को तोड मरोड़ कर अभिजात्य जातियों का इतिहास बना दिया गया हैं|

Gurjar gujjar kanishka samrat gurjar history

गुर्जर शब्द स्थान वाचक हैं या कबीले का नाम ? इस प्रश्न को खड़ा करके गुर्जरों को उनके इतिहास से वंचित करने के प्रयासों से सभी परिचित हैं| वर्तमान इतिहास लेखन की इस परिपाटी से गैर-अभिजात्य कबीलों और जातियों का इतिहास और उनकी पहचान मिटती जा रही हैं| इस सब के बावजूद, समाज में अपनी सम्मान जनक पहचान पाने के लिए, ये गैर-अभिजात्य कबीले और जातियां अपना सही इतिहास लिखने के स्थान पर, अपने को मिथकीय पात्रो से जोड़कर देखने का औचित्यहीन प्रयास कर रहे हैं |

 

कनिष्क गुर्जर kanishka

कुषाण/कसाना वंश के कनिष्क महान (78-101 ई.) और उसके पिता विम कडफिस भारत के मात्र ऐसे सम्राट हैं, जिनकी समकालीन मूर्तिया, हमें उनकी राजधानी मथुरा से, प्राप्त हुई हैं| लेकिन सभी मूर्तियों सिरविहीन हैं| ये सिरविहीन मूर्तिया हमारे मिटे हुए इतिहास और पहचान का प्रतीक हैं|

कनिष्क गुर्जर इतिहास kanishka gurjar

ब्लॉग जनइतिहास पर “गैर अभिजात्य कबीलों और जातियों के इतिहास लेखन” के माध्यम से मैंने अपने पूर्वजों के चेहरों को पहचाने का प्रयास किया हैं| गुर्जरों के पूर्वज कनिष्क और और उसके वंश पर भी अनेक लेख इस ब्लॉग पर है| सम्राट कनिष्क का ‘राज्य रोहण दिवस’ ‘22 मार्च: अन्तराष्ट्रीय गुर्जर दिवस’ अपने पूर्वजों के इतिहास से जुड़ने और अपनी पहचान को पुनः कायम करने का एक साधन हैं|

कनिष्क kanishka

मेरे आग्रह पर कुछ युवा साथी आगे आये और सम्राट कनिष्क का ऐतिहासिक लक्षणों से युक्त एक सुंदर चित्र और चिन्ह बनाये गये | 22 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस का आयोजन जगह जगह पर शुरू किया गया ! पिछले कई सालो से लगातार बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में हिस्सा ले रहे है |कुछ साथियो द्वारा कनिष्क की  मूर्ति का निर्माण भी जोरो पर है ! सम्राट कनिष्क के चित्र और मूर्ति का निर्माण हमारी प्रतीकात्मक विजय का उद्घोष हैं|
सभी को 22 मार्च: अन्तराष्ट्रीय गुर्जर दिवस की बधाई !

डॉ सुशील भाटी

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