1857 क्रांति :भाला और कुल्हाड़ी लेकर गुर्जरी भिड गयी थी अंग्रेज सिपाहियों से!

1857 क्रांति :भाला और कुल्हाड़ी लेकर गुर्जरी भिड गयी थी अंग्रेज सिपाहियों से!

1857 की क्रांति में मेरठ के गुर्जर गाँवों के  साथ साथ बुलंदशहर के गुर्जरों के गाँव भी बागी हो चुके थे ! गाँवों के सभी पुरुष मोर्चे पर लड़ाई करने चले जाते और गुर्जर महिलाएं (गुर्जरी)  और बच्चे हथियार लेकर गाँवों में पहरा दिया करते थे कि कहीं अंग्रेज धावा न बोल दे !

ये कहानी है जिला बुलंदशहर के गाँव गुठावली और आस पास के गाँवों की गुर्जर महिलाओं (गुर्जरी) की बहादुरी की , जब अंग्रेजो से टक्कर लेने की वजह से अंग्रेजी सेना इन गाँवों पर अत्याचार कर रही थी और गुर्जरी  महिलाए मर्दों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर सहयोग कर रही थी ! अंग्रेजी सरकारों के जुल्मो से बचने के लिए ये क्रांतिकारी जंगलो में उत्तर प्रदेश , राजस्थान और मध्यप्रदेश के जंगलो में मारे मारे फिर रहे थे !

gurjari , gurjar 1857 revolt bulandshahr meerut 1857 क्रांति मेरठ गुर्जर गुर्जरी vijay singh pathik विजय सिंह पथिक

Pic source – Pinterest.com

इन्ही में से एक गुर्जरों के गाँव गुठावली की माता कमल कुंवरी जोकि महान स्वतंत्रता सेनानी  विजय सिंह पथिक की माताजी थी अपनी अन्य गुर्जरी साथियों के साथ अनूपशहर के पास जंगलो में थी ! उन्होंने ही ये सारा वृतांत पथिक जी को सुनाया था जिसे पथिक जी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है ! आप भी सुनिए –

अंग्रेजी सेना की टुकड़ी गाँव में पड़ी होने के कारण गाँवों में आना जाना बंद था ! पुरुष खाने के सामान का प्रबंध करने और शत्रु का पता लेने दूर निकल गये थे ! सभी महिलाएं पेड़ो के नीचे बैठकर कपड़ो की मरम्मत कर रही थी ! तभी एक पास के गाँव के 12-१३ साल के मुस्लिम बच्चे ने सूचना दी कि कुछ सिपाही हमला करने आ रहे है ! महिलाएं हक्की बक्की खड़ी हो गयी ! लेकिन कुछ युवा गुर्जरी भाले कुल्हाड़ी आदि उठा लायी और दो लडकियां बन्दूक लेकर खड़ी हो गयी ! उन्हें देखकर सिपाही कुछ सहम गये और इतने में हम संभल गयी और भाला , कुल्हाड़ी जो जिसके हाथ पड़ा उठा लिया ! वे लोग हाथ हिलाकर कुछ कह रहे थे ! लेकिन हमारा ध्यान उन पर ही था !

 

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अचानक पीछे से दो बन्दूक वाली लडकियों पर अंग्रेजी सिपाही टूट पड़े ! अचानक हुए इस हमले में लड़कियां बन्दूक नहीं चला सकी लेकिन एक ने हमलावर को कुंदा मारकर गिरा दिया ! दुसरे ने लड़की और उसकी बन्दूक को बुरी तरह पकड़ लिया था | अचानक एक तीसरी युवा लड़की ने कुल्हाड़ी से वार किया और उसे शांत कर दिया ! इधर से हम लोग भी टूट पडी ! दूर खड़े सिपाही और गोरे भी आकर हमसे भिड गये !

इस पूरे वाकये में ये स्पष्ट था कि वे हमे गोली नहीं मारना चाहते थे और हमे जिन्दा पकड़कर बलात्कार करना चाहते थे ! लेकिन हमने भाला और कुल्हाड़ी चला चलाकर कई को बुरी तरह घायल कर डाला ! अब वे भी गोलियां चलने लगे ! दो लडकियों ने अब साहस दिखाया और नाक पर मुक्का मारकर दो की बंदूके छीन ली ! इस दौरान हमारी दो लड़कियां भी घायल हो गयी ! हथियारबंद सिपाहियों को इस तरह लड़ता देख हम लोग डर लगने के बावजूद उनसे पूरी जान लगाकर लड़ रही थी ! अचानक मचे इस शोर शराबे से पास में गाय -भेस चरा रहे ग्वालिया अपने गाय बैलो को भागकर ले आये और सारे पशु एकदम उनकी टुकड़ी पर टूट पड़े ! एकदम हुए इस अप्रत्याशित हमले से वे घबरा गये और भाग छूटे ! कुछ ही देर में हमारे पास हमारे पुरुष साथी भी आ पहुचे ! अंग्रेजी सेना के चार सिपाही जोकि वहीँ घायल पड़े थे अब हमने उनको ठिकाने लगाया और उनके हथियार गोला बारूद अपने कब्जे में ले लिया ! और राहत महसूस की ! लेकिन ये सब क्षणिक था !

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सांकेतिक तस्वीर

हम जानते थे कि ये लोग बदला लेने फिर से आयेंगे और अभी दिन छिपने में समय था ! रात हुए बिना निकलना खतरे से खाली नहीं था !

इसी दौरान साथी पुरुषो ने ये पता लगा लिया था कि अंग्रेजो की जो टुकड़ी यहाँ घूम रही है उसमे दो सौ से अधिक आदमी नहीं है ! हमारे अधिकतर साथी जो हमारे गाँव के थे अभी तक लौटे नहीं थे ! उनकी चिंता लगातार लगी हुई थी और ये विपत्ति सामने थी ! धीरे धीरे अँधेरा होते ही बन्दूको की आवाजे गरजने लगी !

हम लोग अपनी साथियो की चिंता कर रहे थे कि वे लोग लौटकर अभी तक क्यों नहीं आये ? कहीं मारे गये या जिन्दा है ? हम लोग आज अपने घरवालो का मुंह देख पायेगे या ऐसे ही मरना होगा !

करीब २ घंटे बाद नजदीक की बंदूके चलना बंद हुई लेकिन दूर से आवाजे अभी भी आ रही थी ! हमारा एक एक पल एक एक बरस की तरह बीत रहा था !

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थोड़ी देर बाद ही हमारे कुछ साथी ढेरो हथियार और कारतूस , कपडे आदि लेकर आये और हमारे पास रख गये ! हमने उनसे अपने साथियो के बारे में पूछा ! उन्होंने बताया कि एक टुकड़ी का सफाया हो गया है और एक से लड़ाई चल रही है ! तब मैंने हमारे बाकि आदमियों के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि घबराने की जरुरत नहीं है सब ठीक है !

थोड़ी देर में ही बाकी लोग भी अंग्रेजी सेनिको को मारकर उनके लूटे हुए हथियार , गोला बारूद और वर्दी लेकर आये और सभी साथी अगली मंजिल के लिए निकल लिए !

विजय सिंह पथिक vijay singh pathik

भारत सरकार द्वारा विजय सिंह पथिक जी के नाम पर जारी डाक टिकट

ये पूरा वाकया गुर्जर जाति में पैदा हुए महान स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक जी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है जोकि उन्हें उनकी माताजी श्रीमती कमल कुंवरी ने बताया था ! विजय सिंह पथिक जी के ऊपर लिखी श्री राजकुमार भाटी जी की पुस्तक “विजय सिंह पथिक” में भी पथिक जी की जीवनी के ये अंश मौजूद है ! इम्पीरियल गजेटियर ऑफ़ इंडिया 1857 की क्रांति के विषय में कहता है कि उस दौरान गुर्जर और रांगड़ (कनवर्टेड मुस्लिम) अंग्रेजो के सबसे भयंकर दुश्मन साबित हुए और गुर्जरों के अधिकतर गाँव बागी हो गये !

प्रस्तुति – S.K Nagar

(यदि आपके पास भी गुर्जर समाज से सम्बंधित कोई भी ऐतिहासिक जानकारी है तो क्रपया हमे जरुर भेजे ! आप हमे 9312001265 पर whatsapp कर सकते है या gurjartoday @ जीमेल डॉट कॉम  पर मेल कर सकते है क्रप्या हमारे फेसबुक पेज से भी जुड़े )

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4 Comments

  1. Suryavanshi Chhatrapal Singh Gurjar - July 5, 2017 reply

    धन्यवाद नागर साहब आप जैसे योद्धाओं की जरूरत है गुर्जर क्षत्रिय समाज को

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